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अणुविभा के तत्वावधान में अणुव्रत की भविष्योन्मुखी दृष्टि विषय पर आनलाइन व्याख्यान का आयोजन

Mar, 2025


अणुव्रत आंदोलन हर युग में प्रासंगिक है -  प्रोफेसर प्रद्युम्न शाह सिंह 
अणुव्रत विश्वभारती सोसाइटी राजसमंद एवं जैन विश्व भारती संस्थान के जैन विद्या तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में अणुव्रत की भविष्योन्मुखी दृष्टि विषय पर एक आनलाइन व्याख्यान का आयोजन 9 मार्च को किया गया। इस कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के जैन बौद्ध दर्शन विभाग के विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर प्रद्युम्न शाह सिंह थे। उन्होंने अपने  उद्बोधन में यह कहा था कि संसार में कुछ चीज ऐसी होती हैं जो केवल काल विशेष में प्रासंगिक होती हैं , लेकिन कुछ ऐसी होती हैं जो किसी काल विशेष में भी प्रासंगिक नहीं होती और कुछ ऐसी होती हैं जिनका हर काल में महत्व होता है। आचार्य श्री तुलसी द्वारा प्रवर्तित अणुव्रत आंदोलन को मैं इसी रूप में पाता हूं । अणुव्रत आंदोलन को कालजयी आंदोलन कहा जा सकता है , क्योंकि इसका अतीत भी अच्छा था,  वर्तमान भी अच्छा है और भविष्य भी अच्छा रहेगा। यह आंदोलन किसी तात्कालिक समस्या के समाधान के लिए नहीं अपितु यह जीवन से जुड़ा हुआ आंदोलन है और चूंकि जीवन तब तक रहता है जब तक संसार रहता है। इसका मतलब कि जब तक संसार है तब तक इस आंदोलन की उपयोगिता सदैव  रहेगी। यह कोई उपासना धर्म  नहीं है कि केवल  संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए ही उपयुक्त हो । यह तो चारित्रिक धर्म है । यह चरित्र विकास की बात करता है , चरित्र निर्माण इसका मुख्य उद्देश्य है । चाहे मंदिर में जाने वाला हो या मस्जिद में जाने वाला हो या गुरुद्वारे और चर्च में जाने वाला हो , चरित्र तो सबके लिए आवश्यक है । यह आंदोलन राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करता है,  ऐसा कहना भी उपयुक्त होगा।
      इस आंदोलन की आचार संहिता बहुत व्यापक है जो प्रायः  हर क्षेत्र को अपने में आत्मसात करती है,  इसीलिए हर क्षेत्र की समस्या का समाधान इस अणुव्रत आंदोलन से मिलता है । चाहे वह नशा मुक्ति की समस्या हो , चाहे वह पर्यावरण की समस्या हो , चाहे सामाजिक कुरीतियों की समस्या हो   , जाति भेद की समस्या हो , सांप्रदायिक उन्माद की समस्या हो , चुनाव शुद्धि की समस्या हो , यह आंदोलन सभी समस्याओं को समाधान देता है,  ऐसा कहना शत प्रतिशत सही होगा। डॉक्टर शाह ने आगे यह बताया कि मुझे बरसों तक गुरुदेव श्री तुलसी के अणुव्रत आंदोलन से जुड़ने का अवसर मिला,  जिसके कारण अणुव्रत को अपने जीवन में उतारकर मैं अपने जीवन को धन्य कर सका हूं, ऐसा कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है । इस अवसर पर उन्होंने आचार्य श्री महाप्रज्ञ और आचार्य श्री महाश्रमण के भी अवदानों को स्वीकार करते हुए कहा कि इस आंदोलन को सशक्त नेतृत्व मिल रहा है इसलिए यह आंदोलन गतिशील है। कार्यक्रम के प्रारंभ में जैन विद्या तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग की सहायक आचार्य इरिया जैन ने मंगलाचरण के रूप में अणुव्रत गीत के दो पद प्रस्तुत किये।  इसके बाद अणुव्रत व्याख्यानमाला के राष्ट्रीय संयोजक प्रोफेसर आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने मुख्य वक्ता प्रोफेसर शाह का स्वागत किया और उनका विस्तृत परिचय भी प्रस्तुत किया तथा विषय प्रवेश करते हुए कहा कि की गुरुदेव  तुलसी ने समय की मांग को देखते हुए जिस अणुव्रत आंदोलन का प्रवर्तन किया था वह समूचे राष्ट्र के लिए वरदान साबित हो रहा है।  कार्यक्रम का कुशल संयोजन इरिया जैन ने किया और धन्यवाद ज्ञापन जैन विद्या तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग के सह आचार्य प्रोफेसर रामदेव साहू ने किया । इस प्रकार यह कार्यक्रम श्रोताओं के अनुभव को देखते हुए अत्यंत उपयोगी कहा जा सकता है।


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